सीन नंबर एक: मुन्नाभाई और सर्किट सब्जी मंडी में सब्जी खरीद रहे हैं। सब्जी वाला भाव बता रहा है- आलू पांच हजार रुपए दर्जन। टमाटर 10,000 प्रति दस ग्राम। भिंडी सिर्फ हाथ लगाने का दस रुपए। डिलीवरी सीधे लॉकर में होगी, क्योंकि रास्ते में लुटने का खतरा है।
मुन्नाभाई- अबे, सर्किट ये हम लोग सब्जी खरीद रेले हैं कि जूलरी?
सर्किट- भाई, सब्जी ही खरीद रेले हैं, जूलरी तो इससे बहुत सस्ती है।
मुन्नाभाई- अबे, वो एक के साथ एक फ्री की स्कीम में हमने दो बंदे किडनैप किएले हैं, उनके खाने का खर्च कितना होगा एक दिन का?
सकिर्ट- भाई, करीब पचास हजार रुपए। मुन्ना भाई बेहोश हो जाता है सुनकर। सर्किट उठा रहा है उसे।
मुन्ना भाई फोन करता हुआ- अबे ओ खड़ूस, अपने बंदों को लेकर जाने का, फ्री में बाप, फ्री में। उधर से आवाज आती हुई- पांच लाख रुपए दो, तब मैं अपने बंदे लेकर जाऊंगा। मुन्नाभाई फिर बेहोश हो गए हैं।
सीन नंबर टू: अकबर- अनारकली, हम तुम्हें जीने नहीं देंगे और सलीम तुम्हें मरने नहीं देगा।
सलीम- जहांपनाह, आप इसे जीने क्यों नहीं देंगे?
अकबर- क्योंकि इसने जो कार लोन हमारे बैंक से लिया था, उसकी ईएमआई यह नहीं दे रही है। इसलिए हम इसे जीने नहीं देंगे। पर सलीम तुम इसे क्यों नहीं मरने दोगे?
सलीम- मैंने अनारकली का इंश्योरेंस किया है। अगर ये मर गई, तो इसके इंश्योरेंस के लाखों मेरी कंपनी को देने पड़ेंगे। वो मुझे नौकरी से निकाल देंगे। जहांपनाह, मैं इसे मरने नहीं दूंगा।
सीन नंबर तीन: अकबर अनारकली से मिल रहे हैं-
अकबर- अनारकली, हम नहीं चाहते कि तुम सलीम से मिलो।
अनारकली- जी बिल्कुल नहीं मिलूंगी, मैं सलीम से मोबाइल पर बात कर लूंगी। पर उसका बिल तो आप देंगे ना? अकबर- नहीं, ये बिल की बात है या दिल की?
अनारकली- मेरी मोबाइल कंपनी वाले इत्ते वाले बड़े लुटेरे हैं कि उनके बिलों का पेमेंट सिर्फ शाही टाइप के लोग ही कर सकते हैं। आप बताइए, प्लीज क्या आप मेरे बिलों का पेमेंट कर देंगे?
अकबर- नहीं अनारकली, वो तो मेरे बिल भी इतने ज्यादा आ रहे हैं। एसएमएस सर्विस के अलग, एमएमएस के अलग, वीएचएस के अलग, बीबीएस के अलग कि मैं पेमेंट नहीं कर सकता। इससे सस्ता तो यह है कि तुम सलीम से प्यार करती रहो।
अनारकली चीखती हुई गिर जाती है- नहीं।
सीन नंबर चार: अमिताभ बच्चन- मौसी, वीरू को कंसीडर कर ले, बसंती के लिए।
मौसी- बाई द वे ये वीरूजी करते क्या हैं? बसंती के लिए कई एनआरआई लाइन लगाए खड़े हैं। धन्नो के लिए भी न्यू यॉर्क के कुछ घोड़ों का ऑफर आया है।
अमिताभ बच्चन- मौसी, अपने वीरू का फॉरेन आना-जाना लगा रहता है, कभी दुबई हवाला के सिलसिले में, कभी स्विट्जरलैंड, खातों-वातों के कारोबार के सिलसिले में।
मौसी- ये हवाला, स्विट्जरलैंड के चक्कर में वीरू फॉरेन क्यों जाता है?
अमिताभ- देखिए, अब सारा काम तो इंडिया में हो नहीं सकता ना। पार्क-वार्क पर कब्जा, दारू-वारू की दुकान टाइप छोटे-मोटे कारोबार से आगे जाना है, तो दुबई, स्विट्जरलैंड जाना ही पड़ता है मौसी।
मौसी- हाय राम, तो क्या वीरू दारू-वारू का धंधा करता है?
अमिताभ- नहीं मौसी, दारू का धंधा ना करना पड़े, इसलिए तो हवाला वगैरह के चक्कर में दुबई जाना पड़ता है।
मौसी- हवाला वगैरह का काम वीरू क्यों करता है?
अमिताभ- मौसी आपको मालूम नहीं, बड़े-बड़े नेता, टॉपम टॉप लीडर सब यही करते हैं। उन्हीं के साथ उठना-बैठना है वीरू का।
मौसी- हाय राम! नेताओं के साथ उठता-बैठता है वीरू क्या वह चोर बदमाश है?
अमिताभ- नहीं, चोर-बदमाश नहीं, वो तो खुदै नेता है।
मौसी- अच्छा, अब यह भी बता दो किस पार्टी में है?
अमिताभ- अभी क्या है कि कई पार्टियों के लिए एक साथ काम करता है। कई पार्टियों के साथ बात चल रही है। जईसे ही मुझे उसकी पार्टी का पता चल जाएगा, आपको खबर कर दूंगा।
या इस सीन का एक एंड यह भी हो सकता है कि मौसी झटके से तैयार हो जाए और कह उठे कि ओके, मैं तो खुद ही बसंती के लिए ऐसा काबिल वर तलाश रही थी।

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