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इंडियन पब्लिक को IPL ने वाकई कर दिया क्रेजी-4


इंडियन प्रीमियर लीग का मैजिक सिर्फ मैदान में नहीं दिख रहा, यह घरों और ऑफिसों के भीतर घुस चुका है। गेम अब टीवी के अलावा कंप्यूटर में भी घुस चुका है। खेल की दीवानगी के मायने भी अब नए हैं। जानते हैं वे चार चीजें जिन्होंने क्रिकेट को पूरी तरह बदल दिया है, सुंदर चंद ठाकुर की रिपोर्ट:


लीग की तर्ज पर इंटरनेट पर कई ऑनलाइन गेम्स आ गए हैं, जो सुपरहिट हैं। अकेले क्रिकेटनेक्स्ट फैंटेसी गेम खेलने वालों की संख्या एक लाख से ऊपर होगी। इसके अलावा ईएसपीएन का सुपर सेलेक्टर्स, खेलो आईपीएल, क्रिकइन्फो का फैंटेसी क्रिकेट, इंडियन फैंटेसी लीग (आईएफएल) और प्रिसिनो आईपीएल फैंटेसी गेम में लाखों लोग रजिस्टर्ड हैं।

इनमें मेंबर को वर्चुअल रकम देकर मैच से पहले अपनी पसंद के 11 खिलाड़ी खरीदने होते हैं। मैच में ये प्लेयर जितना बढ़िया खेलते हैं, उतने ही पॉइंट आपके। विनर्स के लिए खूब इनाम हैं। ऑनलाइन गेम्स खेलने वालों के लिए आईपीएल के पक्के दर्शक साबित हो रहे हैं। उनके लिए मैच देखने का मजा कुछ और बढ़ जाता है, क्योंकि मैच में सिर्फ एक टीम ही नहीं जीत या हार रही होती, दांव पर लगा हर खिलाड़ी आपको जीत या हार के उत्तेजक अहसास से भरता है।

सीरियल किलर: लीग ने टीवी पर प्राइम टाइम को अपने कब्जे में कर लिया है, और बड़ी वजह है घर की महिलाओं का चेंज्ड टेस्ट। मर्द तो क्रिकेट के क्रेज के चलते पहले से बदनाम थे, अब इन महिलाओं को भी लीग ने यही चस्का लगा दिया है। बॉलिवुड के सितारों ने टीवी के छोटे कलाकारों को पीछे सरकाकर उनकी जगह ले ली है।

भला शाहरुख की ऐसी कौन सी फैन होगी, जो उनके राइडर्स को जीतते न देखना चाहे। अक्षय कुमार को चाहने वाली लड़कियां दिल्ली के मैच देखती हैं और प्रीति जिंटा की फैंस मोहाली के मैच नहीं छोड़तीं। फिर बेंगलुरु से जुड़ी कटरीना कैफ हैं और टी-ट्वेंटी के दीवाने बने दूसरे सितारे भी हैं, जिनकी हर मैच में इन स्टार्स की झलक मिल ही जाती है। जिन घरों में महिलाओं को लीग पसंद नहीं, वहां रिमोट को लेकर झगड़ा है क्योंकि बच्चे और पतिदेव तीन घंटे के इस तूफान के पहले ही दीवाने हो चुके हैं।

फैन का फंडा: यह कम ताज्जुब की बात नहीं कि लीग ने इंडियंस को क्षेत्रवाद से अलग कर दिया है। लीग के फॉरमैट के फंडे से यह एकदम उलट है। दिल्ली वाले मुंबई की जीत का भी जश्न मना रहे हैं, तो दिल्ली की हार का भी। उन्हें अपने जाट हीरो सहवाग के छक्के जितने अच्छे लग रहे हैं, गुजरात के पठान भाइयों का कमाल भी उतना ही पसंद आ रहा है।

दिल्ली वाले मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, सबकी जीत पर बराबर जश्न मना रहे हैं। ऐसा हो भी क्यों न, क्योंकि लीग में पहचान का भयानक घालमेल हो गया है। दोनों पठान भाई गुजरात के हैं मगर एक राजस्थान से खेल रहा है एक मोहाली से। विराट कोहली, इशांत शर्मा दिल्ली के युवा तुर्क हैं, मगर खेल बेंगलुरु और कोलकाता से रहे हैं। पब्लिक को किसी टीम की हार पर दुख हो न हो, उसके लिए हर टीम की जीत जश्न का सबब बन गई है।

ये दोस्ती...: भज्जी और श्रीशांत, सौरभ और वॉर्न... इन दो झगड़ों को भूल जाइए तो आईपीएल में दोस्ती का नया रंग देखने को मिला है। कभी जो एक-दूसरे पर बरसते थे वे आज एक-दूसरे की कामयाबी का जश्न साथ मना रहे हैं। पॉन्टिंग और इशांत कोलकाता के लिए तो मैथ्यू हेडन और धोनी चेन्नै की जीत के लिए टीमवर्क कर रहे थे।

कभी एक-दूसरे के आमने-सामने रहे साउथ अफ्रीका के कप्तान ग्रीम स्मिथ और ऑस्ट्रेलिया के शेन वॉर्न मिलकर जयपुर की जीत की कहानी लिख रहे हैं। वैसे ये खिलाड़ी जब आपस में खेल रहे हैं तो इनकी स्ट्रैटिजी के राज भी अब आपस में जरूर बंट गए होंगे। इंटरनैशनल क्रिकेट पर इन बदलते रिश्तों का असर देखने लायक होगा।
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