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28 मई, 2008


ब्लॉग्स (2)
लेखकः मुंशी प्रेमचंद प्रातःकाल महाशय प्रवीण ने बीस दफा उबाली हुई चाय का प्याला तैयार किया और बिना शक्कर और दूध के पी गए। यही उनका नाश्ता था। महीनों से मीठी, दूधिया चाय न मिली थी। दूध और शक्कर उनके लिए जीवन के आवश्यक पदार्थों में न थे। घर में गए जरूर कि ... आगे पढ़ें...

तोते की तलाश में आत्माराम उसने एक हाथ में पिंजड़ा लटकाया, बगल में कलसा दबाया और घर चला। जब दिन निकल आया, तो वह सीधे पुरोहित जी के घर पहुँचा। पुरोहित जी पूजा पर बैठे सोच रहे थे-कल ही मुकदमे की पेशी है और अभी तक हाथ में कौड़ी भी नहीं। इतने में महादेव ने ... आगे पढ़ें...