थोड़ी नटखट, थोड़ी मासूम, थोड़ी सी सयानी है।
'सुमन' सा चेहरा, खुशबु सा बदन उसकामोहब्बत की मूरत वो थोड़ी सी दिवानी है।
आँखे नशीली, होंठ रसीले और खाक करता हुश्न
नाजुक सा बदन उसका उफ् क्या मदमस्त जवानी है।
चाहत की अंगड़ाई लेती फिर पलटकर मुस्कुराती है
बाहों में है जन्नत उसके वो नजरों से शर्माती है।
सपनों में करती है मुझसे प्यारी-प्यारी बातें
मेरे सोये रहने के पिछे बस इतनी सी कहानी है।
दिन की वीरानी बढ़ती जाए
रात का साया हाथ बढ़ाए
मन मेरा घबड़ाए, हाए...मन मेरा घबड़ाए
उसकी आँखों का वो काजल
जैसे गगन में काले बादल
उमड़ें घुमड़ें हाय ! मन मेरा घबड़ाए...
आँखों आँखों की वो बातें
वो नन्ही छोटी मुलाकातें
बरबस याद आ जाएँ, मन मेरा घबड़ाए...
उससे मैं कुछ कहना चाहूँ
फिर भी जाने क्यूँ कह ना पाऊँ
कुछ सोचूँ मैं , कुछ हो जाए, मन मेरा घबड़ाए...
वो जो मंद-मंद मुस्कुराए
हम पर नयन तीर बरसाए
घायल ना हो जाएँ, हाए...मन मेरा घबड़ाए
अपनी जुल्फें जो लहराए
मेघ उमड़-घुमड़ के आए
बिजली ना गिर जाए, हाय...मन मेरा घबड़ाए...

लोड हो रहा है...