चाँदनी रात के हमसफ़र खो गये चाँदनी रात मेंबात करते हुए रह गये, क्या हुआ बात ही बात मेंज़िन्दगी भी तमाशाई है, हम रहे सोचते सिर्फ़ हमदेखती एक मेला रही, हाथ अपना दिये हाथ मेंजिनका दावा था वो भूल कर भी न लौटेंगे इस राह परयाद आई हमारी लगा आज फिर उनको बरसात ...
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